अलौकिक शक्तियां
अलौकिक शक्ति (देवीय शक्ति)
विधा**लेख (गद्य में)
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इस विषय पर बात करना बहुत विशाल है।
श्रद्धा और विश्वास, यह दो ऐसे तरीके हैं जिनके जरिए ईश्वर को पाया जा सकता है।
मनुष्य जीवन तभी अपने असल उद्देश्य को प्राप्त कर लेता है।
जब मनुष्य अपना आत्म साक्षात्कार प्राप्त कर परमात्मा से जुड़ता है और फिर उसे ब्रह्मांड से वास्तविक सत्य का ज्ञान हो जाए।
अध्यात्म के जरिए ईश्वर की खोज की जाती है। बहुत से मनुष्य अपना पूरा जीवन ऐसी खोज में लगा देते हैं।
हर कोई परमात्मा का सानिध्य पाना चाहता है, लेकिन ऐसे सौभाग्यशाली लोग बहुत कम है, जिन्हें स्वयं ईश्वर अपना सानिध्य देने के लिए तैयार रहते हैं।
प्रेम की दिव्य शक्ति के सम्मुख सारा असत्य लड़खड़ा जाता है।
आसुरी शक्ति कुछ समय के लिए रह सकती है परंतु अन्यथा उसका पतन हो जाता है।
यह सब उस परम आलौकिक देवी शक्ति का कार्य होता है।
अपने आप को मजबूत करने के लिए पहली बात, मनुष्य को आत्मनिरीक्षण करना चाहिए।
वह है, (अपने भीतर के प्रकाश को प्रतिबिंबित करें।)
और खुद को देखें। आप कहां थे कितने दूर निकल आए अभी और कितनी दूर जाना है।
ऐसी कौन सी शक्ति है, जो आपकी कमी को पूरा कर शक्ति प्रदान करती है।
आश्चर्य होगा जब आप अपने आपको देखना शुरू करेंगे निष्पक्ष।
किसी भी भूतों को दोष नहीं देना या अपने भीतर के किसी बुरे को दोष नहीं देना चाहिए।
आप यह समस्या है आप बहुत साफ देख सकते हैं।
आत्मा के प्रकाश में आप उन्हें स्पष्ट रूप से देख सकते हैं।
यह कैसे जाना?
आत्म साक्षात्कार के द्वारा.
किसी ज्ञानी से ही आत्म साक्षात का लेना चाहिए.
जब आप ध्यान में अपने इष्ट के सामने हाथ फैला कर बैठे हैं निर्विचार होते हैं, और हथेलियों से पैरों के तलवों से सिर के ऊपरी भाग से ठंडी ठंडी हवा आती है।
यही परम देवी शक्ति अलौकिक शक्ति है।
संत महापुरुषों ने अलग-अलग इस हवा के नाम दिए हैं।
चैतन्या लहरी, सलीलम सलिलम, रूह, निरानंद, एक ओंकार। इत्यादि।
मोहम्मद साहब ने भी कहा है कि, जब कियामा का वक्त आएगा तो हाथ बोलेंगे। यही शीतल लहरिया और कूल ब्रीज, vibration be kahate Hain।
इन्हें लहरियों का ज्ञान होना भी मनुष्य को बहुत जरूरी है।
यह तो मैं अपने अनुभव से कह रही हूं। इन लहरियो का मतलब हमारे शरीर की सभी नसे नाड़ियों से संबंध रखता है पूरा साइंस है।
लौकिक और अलौकिक*
यहां किसी वस्तु का इस लोक से अथवा इस लोक से बाहर होने के संबंध में बताते हैं। जो इस लोक से संबंध रखता है वह (लौकिक।
अब इस लोक का अर्थ केवल पृथ्वी नहीं ना सौरमंडल, अपितु पूर्ण भौतिक ब्रह्मांड से है। जो भौतिक ना हो वह अलौकिक।
जो परमात्मा के सानिध्य से हमें शक्तियां मिलती है कभी भी इनका दुरुपयोग नहीं करना चाहिए नकारात्मकता फैलाती हैं। इनका परिणाम सदा बुरा होता है।
यदि ज्यादा पूजा पाठ करके ध्यान तब से हम ईश्वर से यह सब शक्तियां मांग के उनका बुरा परिणाम करेंगे तो बुरा ही नतीजा होगा।
सदा ही शक्तियों को अच्छे कार्य के लिए लगाएं लोगों के रोग दूर भगाएं। विश्व में सकारात्मकता फैलाएं।
इन शक्तियों के बारे में लिखने में कोई गलत हो गया तो क्षमा चाहते हैं।
गीता ठाकुर दिल्ली से
प्रतियोगिता हेतु लेख
स्वैच्छिक